श्री सरस्वती संस्कृत पाठशाला सनिगवां की स्थापना स्वर्गीय पंडित दुलारेलाल जी मिश्र शास्त्री सनिगवां जिला कानपुर निवासी ने भाद्र पद कृष्ण 12 बुधवार विक्रमाद 1964 दिनांक 4 सितम्बर 1907 को इस संस्कृत पाठशाला की स्थापना की। जिसका उद्देश्य संस्कृत भाषा का संवर्धन,संस्कार युक्त शिक्षा तथा छात्रों में स्वालम्बन की भावना का विकास करना है तथा छात्रों को वेद वेदांग, आयुर्वेद, ज्योतिष, पुराण इतिहास, व्याकरण, साहित्य दर्शन सामायिक उपयोगी शिक्षा प्रदान कर भारतीय संस्कृति की रक्षा करना है।
विद्यालय का उद्देशय छात्रों के वैदिक और लौकिक अभिरुचि के अभिवर्धन के साथ साथ समस्त प्राचीन एवं आधुनिक विषयो में अभिरुचि उत्पन करना है तथा साथ ही छात्रों के शारीरिक एवं मानसिक तथा बौद्धिक शक्तियों के विकास का समुचित प्रयत्न करना। विद्यालय में उत्तरमध्यमा तक की कक्षाएं संचालित है। विद्यालय का परीक्षाफल प्रायः शत प्रतिशत रहता है। यह विद्यालय इस क्षेत्र का सबसे प्राचीन शिक्षण संस्था है। संस्कृत भाषा का के स्वर्ण युग का प्रतीक यह विद्यालय सदा से नये नये कीर्तिमान स्थापित करता रहता है। यहां से पढ़कर निकलने वाले छात्र समाज के विभिन्न संस्थानों में जैसे- सेना, शिक्षा, डाक विभाग में अपनी सेवा प्रदान कर रहे है। इस क्षेत्र की सबसे प्राचीन यह संस्था संस्कृत विद्या तथा भारतीय संस्कृति को अनंत काल तक अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए सदा कटिबद्ध तथा प्रयत्नशील रहेगी।
विद्यार्थी जीवन प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति के जीवन का स्वर्ण काल होता है। प्रत्येक विद्यार्थी उपजाऊ भूमि पर लहलहाती फसल के समान है। जिस पर प्रत्येक देश और समाज की आधारशीला निर्मित होती है। विद्यार्थी राष्ट्र के भविष्य निर्माता होते है देश के विकास रूपी रथ के वाहक विद्यार्थी ही होते है। जिस देश के विद्यार्थी शारीरिक तथा मानसिक रूप से जितने मजबूत होंगे उस देश का विकास रूपी रथ संसार की प्रगति रूपी दौड़ में उतनी ही तीव्र गति से आगे बढ़ता है। हमारा विद्यालय श्री सरस्वती संस्कृत विद्यालय सनिगवां छात्रों के विभिन्न चरणों के महत्व से परिचित है और हमारे विद्यालय की गतिविधियों को बच्चो की अन्तर्निहित प्रतिभाओ की पहचान करने और उनका पोषण करने की योजना है। हमारे विद्यालय में शिक्षण और सीखने की प्रतिक्रिया मुख रूप से बच्चो पर केंद्रित है और हम उन्हें करियर के लिए तैयार कर पर्याप्त जीवन कौशल प्रदान करते है। विद्यालय की गतिविधियों को योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया जाता है और पाठ्यक्रम एवं गतिविधियों को समान महत्व दिया जाता है। विद्यालय पूरी तरह से प्रकृति के सुन्दर मनोहारी वातावरण तथा उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे से सुसज्जित है। जो सुचारु शिक्षण और सिखने की प्रक्रिया के लिए एक आदर्श और सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है। मुझे यह व्यक्त करने में हार्दिक हर्ष एवं गर्व महसूस हो रहा है कि हमारा विद्यालय शैक्षणिक और मानवीय उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए सभी पहलुओं में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
धन्यवाद
प्रधानाचार्या